- डॉ. सुजाता चौधरी ने मौसमी खांसी और गले की खराश के प्रबंधन में डाबर हॉनिटस जैसे हर्बल फॉर्मूलेशन के लाभों पर प्रकाश डाला
आगरा 22 जुलाई 2026। बदलते मौसम, बढ़ते प्रदूषण स्तर और मौसमी संक्रमणों के कारण श्वसन संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में आयुर्वेद विशेषज्ञ खांसी और गले की असुविधा के प्रबंधन के लिए प्राकृतिक उपचारों के महत्व पर जोर दे रहे हैं। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, डाबर हॉनिटस जैसे हर्बल कफ सिरप न केवल खांसी के लक्षणों को शांत करने में मदद करते हैं, बल्कि संपूर्ण श्वसन स्वास्थ्य को भी समर्थन प्रदान करते हैं।
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सुजाता चौधरी ने कहा, “खांसी शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से श्वसन तंत्र से उत्तेजक तत्वों और अतिरिक्त बलगम को बाहर निकाला जाता है। आयुर्वेद केवल लक्षणों से राहत देने पर ही नहीं, बल्कि श्वसन संबंधी असुविधा के मूल कारण बनने वाले असंतुलन को दूर करने पर भी ध्यान देता है। आयुर्वेद में पारंपरिक रूप से उपयोग की जाने वाली औषधीय जड़ी-बूटियां गले की जलन को शांत करने, श्वसन क्रिया को सहयोग देने और बिना किसी कठोर रासायनिक तत्वों पर निर्भर हुए राहत प्रदान करने में सहायक होती हैं।”
आयुर्वेद में लंबे समय से तुलसी, मुलेठी, बनफ्शा, कंटकारी, सोंठ (सूखी अदरक) और वासा (वसाका) जैसी औषधीय जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता रहा है। ये जड़ी-बूटियां अपने गले को आराम पहुंचाने वाले, कफ निकालने में सहायक तथा प्रतिरक्षा प्रणाली को समर्थन देने वाले गुणों के लिए जानी जाती हैं। इनका संयुक्त प्रभाव खांसी से राहत देने, गले की खराश को कम करने और श्वास लेने में आसानी प्रदान करने में मदद करता है।
डॉ. चौधरी ने आगे कहा, “जहां पारंपरिक कफ दवाएं अक्सर केवल लक्षणों को दबाने पर केंद्रित होती हैं, वहीं आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन शरीर की प्राकृतिक प्रणालियों को संतुलित करने का प्रयास करते हैं। सावधानीपूर्वक चुनी गई जड़ी-बूटियां श्वसन तंत्र को आराम देने, बलगम को ढीला करने और मौसमी खांसी के दौरान राहत प्रदान करने में मदद कर सकती हैं।”
विश्वसनीय आयुर्वेदिक कफ फॉर्मूलेशनों में डाबर हॉनिटस एक प्रमुख नाम है, जो श्वसन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के गुणों से युक्त है। यह सिरप खांसी और गले की जलन से राहत प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है तथा इसमें समय-परीक्षित आयुर्वेदिक अवयवों के चिकित्सीय गुणों का लाभ मिलता है।
डॉ. चौधरी ने कहा, “तुलसी और मुलेठी जैसी जड़ी-बूटियां आयुर्वेद में गले को आराम पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं, जबकि वासा और कंटकारी जैसी जड़ी-बूटियां श्वसन स्वास्थ्य को सहयोग प्रदान करती हैं। इस प्रकार के फॉर्मूलेशन इन पारंपरिक जड़ी-बूटियों को एक सुविधाजनक और प्रभावी रूप में उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं।”
सुरक्षित, प्राकृतिक और समग्र स्वास्थ्य समाधानों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि के बीच, आयुर्वेदिक कफ सिरप आज भी उन परिवारों की पसंद बने हुए हैं जो मौसम में बदलाव के दौरान हर्बल सहायता और प्रभावी राहत की तलाश करते हैं।


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