मथुरा, 26 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और शहरों में होटल, ढाबे, कैफे और रेस्तरां जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का खुलेआम और अवैध रूप से उपयोग किए जाने का मामला सामने आया है। इस गंभीर विषय को संज्ञान में लेते हुए ‘ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन’ ने उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य एवं रसद विभाग के प्रमुख सचिव/सचिव को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
फाउंडेशन के स्वयंसेवकों द्वारा जमीनी स्तर पर किए गए निरीक्षण और सर्वेक्षण के बाद एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित 3,946 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की विस्तृत सूची तैयार की गई है, जहाँ घरेलू गैस सिलेंडरों का कथित रूप से अवैध उपयोग किया जा रहा है। इनमें कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, देवरिया, मथुरा, सुल्तानपुर सहित कई अन्य जिले शामिल हैं।
नियमों का उल्लंघन और दुर्घटनाओं का खतरा
पत्र में बताया गया है कि व्यावसायिक परिसरों में घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग एलपीजी नियंत्रण आदेश, 2000 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत गंभीर और दंडनीय अपराध है।
इसके अलावा, व्यावसायिक और घरेलू गैस सिलेंडरों के दबाव में अंतर होता है। व्यावसायिक उपकरणों के साथ घरेलू सिलेंडरों का उपयोग करने से दबाव बढ़ सकता है, जिससे विस्फोट या भीषण आग लगने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। ऐसी अवैध गतिविधि के कारण दुर्घटना होने की स्थिति में सामान्यतः बीमा दावों को अस्वीकार किए जाने की संभावना रहती है। यह प्रथा आम नागरिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा को सीधे खतरे में डालती है।
तत्काल कार्रवाई की मांग
संगठन ने संबंधित विभाग से मांग की है कि इस अवैध प्रथा पर रोक लगाने के लिए तत्काल छापेमारी अभियान चलाया जाए और सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में केवल व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों के उपयोग को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।
इस पत्र की प्रतियां आगे की कार्रवाई के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड, नई दिल्ली को भी भेजी गई हैं।

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