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नैसकॉम फाउंडेशन और इसरा ने सिस्को के इंडिया कैश ग्रांट प्रोग्राम के सहयोग से [उत्तर प्रदेश] में आदिवासी और पिछड़े समुदायों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्य स्तरीय चर्चा का आयोजन किया



  • इस चर्चा में सरकार, सिविल सोसाइटी, शिक्षाविदों और विकास कार्यों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया, ताकि राज्य भर में ई-गवर्नेंस और सामाजिक सुरक्षा सेवाओं की पहुंच को आसान बनाया जा सके।

आगरा 03 नवंबर 2026। नैसकॉम फाउंडेशन और इसरा ने सिस्को के इंडिया कैश ग्रांट प्रोग्राम के सहयोग से [लखनऊ, उत्तर प्रदेश] में "एक्सेस टू एम्पावरमेंट: स्ट्रेंथनिंग डिजिटल इंक्लूजन एंड ई-गवर्नेंस फॉर ट्राइबल एंड मार्जिनलाइज्ड कम्युनिटीज" विषय पर एक राज्य स्तरीय चर्चा का आयोजन किया। 'एक्सेस टू एम्पावरमेंट - ई-गवर्नेंस' पहल के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मकसद राज्य भर के पिछड़े समुदायों के लिए डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देना और उनके लिए डिजिटल जन सेवाओं व सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच को आसान बनाना है।
    इस चर्चा ने सभी हितधारकों को एक ऐसा मंच दिया जहां [उत्तर प्रदेश] के मौजूदा ई-गवर्नेंस सिस्टम पर बात की जा सके। साथ ही, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs), ग्रामीण आबादी, महिलाओं, युवाओं और अन्य पिछड़े समुदायों के सामने आने वाली डिजिटल बाधाओं को दूर करने की रणनीतियों पर विचार किया गया। बातचीत मुख्य रूप से डिजिटल साक्षरता, सरकारी सेवाओं की जागरूकता, जरूरी दस्तावेजों तक पहुंच, कनेक्टिविटी और अंतिम व्यक्ति तक सेवाएं पहुंचाने जैसी चुनौतियों पर केंद्रित रही। प्रतिभागियों ने सरकार, सिविल सोसाइटी और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी ज़ोर दिया ताकि पिछड़े नागरिकों तक डिजिटल सेवाएं और उनके हक़ आसानी से पहुंच सकें।
    समुदाय स्तर पर डिजिटल सशक्तिकरण के इस विजन में सिस्को भी शामिल है, जो इस पहल का एक प्रमुख भागीदार है। इस सहयोग पर बात करते हुए, सिस्को साउथ एंड साउथईस्ट एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ पॉलिसी ऑफिसर, हरीश कृष्णन ने कहा, “सिस्को सरकार द्वारा चलाए जा रहे डिजिटल सशक्तिकरण कार्यक्रमों के प्रभाव को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस ई-गवर्नेंस प्रोग्राम के तहत नैसकॉम फाउंडेशन के साथ हमारी निरंतर साझेदारी इसी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसका मकसद भारत के आकांक्षी ब्लॉकों में नागरिकों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाना और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।”
    इस दौरान सरकारी सेवाओं, अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच को आसान बनाने में डिजिटल तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। स्टेकहोल्डर्स ने समुदाय स्तर पर डिजिटल क्षमताएं बढ़ाने, जागरूकता और पहुंच के प्रयासों को विस्तार देने पर ज़ोर दिया। साथ ही, डिजिटल सेवाओं तक सबकी समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकारी एजेंसियों, सिविल सोसाइटी संगठनों और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल को बढ़ावा देने की बात कही।
    इस मौके पर नैसकॉम फाउंडेशन की सीईओ ज्योति शर्मा ने कहा, "दूरी, सीमित कनेक्टिविटी, भाषा, दस्तावेज और डिजिटल सिस्टम की जानकारी न होने के कारण कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के लिए उन सेवाओं और अधिकारों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, जो उनके लिए बने हैं। यहीं पर नैसकॉम फाउंडेशन का डिजिटल साक्षरता और ई-गवर्नेंस पहुंच से जुड़ा काम अहम हो जाता है। सिस्को की सीएसआर पहल के सहयोग और इसरा के साथ साझेदारी में, हम डिजिटल जागरूकता बढ़ाने, डिजिटल साक्षरता को मजबूत करने और PVTG समुदायों को सरकारी सेवाओं और योजनाओं तक पहुंचने में मदद करने के लिए आकांक्षी ब्लॉकों में काम कर रहे हैं। लखनऊ में आयोजित इस तरह की चर्चाओं से हम यह सुनिश्चित करते हैं कि यह प्रोग्राम उन लोगों की जमीनी हकीकत को समझे, जिनकी मदद के लिए इसे बनाया गया है।"
    श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के डीटीएनबीडब्ल्यूईडी के चेयरपर्सन, विरजेश उपाध्याय ने कहा, "हमें एक ऐसा ढांचा तैयार करने की दिशा में काम करना होगा जो PVTGs को हमारी सभी योजनाओं और कार्यक्रमों का केंद्र बनाए। हमें योजनाओं के प्रभाव का भी विश्लेषण करने की जरूरत है। योजनाएं तो निश्चित रूप से बनी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका क्या असर है? इन योजनाओं के ढांचे के कुछ पहलुओं में सुधार की जरूरत है। सरकार के पास पारंपरिक ढांचे हैं, लेकिन हमें यह देखने की जरूरत है कि क्या ये जमीनी स्तर पर पहुंचे हैं। अगर योजनाएं लाभार्थियों तक नहीं पहुंचती हैं, तो उनका कोई फायदा नहीं है।"
    इस चर्चा का एक प्रमुख निष्कर्ष यह रहा कि सर्विस डिलीवरी और सरकारी योजनाओं तक पहुंच में सुधार के लिए ब्लॉक और गांव स्तर पर विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया जाए। इसमें पंचायत और श्रम विभागों, ग्राम प्रधानों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच करीबी समन्वय शामिल है। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि श्रम अधिकारों, किसान कल्याण पहलों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जागरूकता को मौजूदा सामुदायिक कार्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए। चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि बुनियादी दस्तावेज और कार्ड बनवाने से आगे बढ़कर, लाभार्थियों को उनके मौजूदा दस्तावेजों का इस्तेमाल करके योग्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में सक्षम बनाया जाए। इसमें रिकॉर्ड सुधारने और जानकारी अपडेट करने में मदद करना भी शामिल है। इसके अलावा, प्रतिभागियों ने विशेष रूप से आदिवासी समुदायों और आकांक्षी ब्लॉकों के निवासियों के बीच डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों के विस्तार पर जोर दिया। साथ ही, विकास संगठनों, सरकारी हितधारकों और सीएसआर पार्टनर्स के बीच मजबूत सहयोग के माध्यम से समग्र डिजिटल इंक्लूजन को बढ़ावा देने की बात कही।
    उम्मीद है कि सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों और सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधि प्रणालीगत बाधाओं को दूर करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए निरंतर मल्टी-स्टेकहोल्डर साझेदारी की आवश्यकता पर विचार-विमर्श करेंगे। इस चर्चा में नागरिक जागरूकता, सामुदायिक लामबंदी और डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम के साथ जुड़ाव मजबूत करने के लिए क्षमता निर्माण के तरीके भी तलाशे जाएंगे।
    उम्मीद है कि यह चर्चा मजबूत सहयोग, ज्ञान साझा करने और एविडेंस-बेस्ड नीतिगत सुझावों के माध्यम से [उत्तर प्रदेश] भर में समावेशी डिजिटल बदलाव को आगे बढ़ाने की सिफारिशों के साथ संपन्न होगी। चर्चा से उभरने वाले विचारों और सुझावों को एक रिपोर्ट में संकलित किया जाएगा। इसे संबंधित हितधारकों के साथ साझा किया जाएगा ताकि भविष्य की कार्रवाई तय की जा सके और डिजिटल सशक्तिकरण व सामाजिक समावेशन की दिशा में राज्य के प्रयासों को समर्थन मिल सके।

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