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डायबिटीज, हृदय रोग और मोटापे पर नियंत्रण में असरदार, रोबोटिक बेरिएट्रिक सर्जरी



आगरा, 30 अक्टूबर 2025। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में हमारे समाज ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और बेहतर जीवनशैली अपनाने की दिशा में काफी प्रगति की है, लेकिन मोटापे की दरों में कमी देखने को नहीं मिली है। आज भी विश्वभर में मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। ऐसे में बेरिएट्रिक  सर्जरी (Bariatric Surgery) उन लोगों के लिए एक प्रभावी समाधान बनकर उभरी है जो वजन कम करने के पारंपरिक तरीकों से सफल नहीं हो पा रहे हैं।
    मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के जनरल सर्जरी और रोबोटिक्स विभाग के कंसल्टेंट डॉ. शलभ अग्रवाल ने बताया कि “बेरिएट्रिक  सर्जरी, जिसे आमतौर पर वेट लॉस सर्जरी भी कहा जाता है, का उद्देश्य मोटापे से ग्रस्त लोगों में वजन कम करने की गति को बढ़ाना होता है। इस सर्जरी के तहत पेट के आकार को छोटा किया जाता है जिससे व्यक्ति को जल्दी तृप्ति महसूस होती है और खाने की मात्रा अपने आप घट जाती है। साथ ही, इस प्रक्रिया के दौरान कुछ हार्मोनल बदलाव भी होते हैं, जो बेसल मेटाबॉलिक रेट को बढ़ाते हैं, जिससे शरीर आराम की अवस्था में भी अधिक कैलोरी जलाता है। हालांकि, सभी बेरिएट्रिक  सर्जरी का तरीका एक जैसा नहीं होता — कुछ पेट का आकार घटाती हैं, कुछ शरीर में न्यूट्रिएंट्स के अवशोषण को कम करती हैं, जबकि कुछ दोनों करती हैं। इसलिए, कौन सी सर्जरी आपके लिए उपयुक्त है, इसका निर्णय डॉक्टर द्वारा किया जाता है।“
    दुनिया की सबसे सामान्य बेरिएट्रिक  सर्जरी में से एक, गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी में पेट को दो हिस्सों में विभाजित किया जाता है ताकि पूरा भोजन छोटी आंत तक न पहुँच सके। पेट का आकार छोटा होने से व्यक्ति को जल्दी भूख मिटने का अहसास होता है, और भोजन का कुछ हिस्सा ही छोटी आंत तक पहुँचने के कारण शरीर में कम पोषक तत्व अवशोषित होते हैं।
    यह सर्जरी खाने की मात्रा को सीमित करती है, जिससे कैलोरी सेवन घटता है और शरीर अधिक ऊर्जा खर्च करता है। इसके अलावा यह भूख कम करती है, तृप्ति की भावना बढ़ाती है और 60-80% तक अतिरिक्त वजन घटाने में मदद करती है।
    डॉ. शलभ ने आगे बताया कि “वजन कम होना इस सर्जरी का सिर्फ एक फायदा है; इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। टाइप 2 डायबिटीज से ग्रस्त मरीजों में यह सर्जरी लंबे समय तक रोगमुक्ति प्रदान करती है, जिससे कई बार इंसुलिन और दवाइयों की आवश्यकता खत्म हो जाती है। हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम भी कम होता है क्योंकि सर्जरी के बाद कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर पर लौट आते हैं। इसके अलावा यह अवसाद को घटाती है क्योंकि मरीजों को आत्मविश्वास वापस मिलता है और सामाजिक जीवन में सुधार आता है। स्लीप एपनिया जैसे रोगों से भी राहत मिलती है, और वजन घटने के कारण जोड़ों पर दबाव कम हो जाता है, जिससे दर्द में स्पष्ट कमी आती है। रोबोटिक तकनीक सर्जरी में नई क्रांति लेकर आई है। यह तकनीक सर्जन को ऑपरेशन क्षेत्र का हाई-डेफिनिशन, 3D और मैग्निफाइड व्यू प्रदान करती है, जिससे वे अत्यधिक सटीकता और लचीलापन के साथ काम कर सकते हैं। इसमें ट्रेमर-फिल्टर्ड आर्टिकुलेटेड इंस्ट्रूमेंट्स का उपयोग होता है जो मानवीय कंपन को समाप्त कर देते हैं, जिससे जटिल सर्जरी भी अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनती है।“
    पारंपरिक सर्जरी की तुलना में इसमें छोटे चीरे लगते हैं, जिससे रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा कम होता है तथा दर्द, निशान और ऊतक क्षति भी न्यूनतम रहती है। परिणामस्वरूप मरीजों को जल्दी रिकवरी मिलती है और अस्पताल में रहने की अवधि कम हो जाती है। इस तरह रोबोटिक सर्जरी न केवल सर्जनों के लिए अधिक सटीकता का साधन है, बल्कि मरीजों के लिए यह तेज़, सुरक्षित और आरामदायक रिकवरी का मार्ग भी प्रदान करती है।

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