मथुरा 14 जनवरी 2026।: जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे हमारी स्पाइन भी उम्र के साथ बदलती जाती है। वर्षों तक वजन उठाना, आगे झुकना, नीचे बैठना, लंबे समय तक बैठकर काम करना और खराब सड़कों पर सफर करना, इन सबका असर धीरे-धीरे स्पाइन पर पड़ता है। ऐसे में अगर अचानक गिरने, भारी वजन उठाने, तेज झुकने या स्पीड ब्रेकर पर झटके लगने जैसी स्थिति हो जाए, तो स्पाइन को चोट लग सकती है, जिससे स्लिप डिस्क, वर्टिब्रल फ्रैक्चर या हल्का डिसलोकेशन हो सकता है।
स्पाइन की उम्र बढ़ने के साथ उसमें कई तरह के बदलाव शुरू हो जाते हैं। डिस्क का सूखना, लिगामेंट्स का सख्त होना, स्पाइन के जोड़ों का घिसना, हड्डियों और मसल्स का कमजोर होना, ये सभी मिलकर एक स्थिति बनाते हैं जिसे डिजेनेरेटिव स्पाइन कहा जाता है। समय के साथ ये बदलाव उस जगह पर दबाव बनाने लगते हैं, जहां से स्पाइनल कॉर्ड गुजरती है। स्पाइनल कॉर्ड दिमाग से निकलकर पूरी स्पाइन के अंदर से होकर नर्व्स के जरिए शरीर तक संदेश पहुंचाती है।
मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मस्क्युलोस्केलेटल साइंसेज एंड ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. समीर आनंद ने बताया “जब नर्व्स पर दबाव पड़ता है, तो उसके काम में रुकावट आती है। इसका असर दर्द, कमजोरी, पैरालिसिस, पेशाब रोकने में दिक्कत या बाउल हैबिट्स में बदलाव के रूप में दिख सकता है। कई बार ये लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं और लोग इन्हें उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि असल में यह संकेत होता है कि नर्व्स पर दबाव बढ़ रहा है और उसे हटाना जरूरी है। लगातार दर्द, कुछ मिनट खड़े या चल न पाना, यूरिन या बाउल कंट्रोल में बदलाव, ये सभी रेड फ्लैग्स हैं, जहां स्पाइन सर्जरी नर्व्स पर से दबाव हटाकर राहत दे सकती है। शुरुआती चरण में अगर आराम, फिजियोथेरेपी या दवाओं से आराम नहीं मिलता, तो सही समय पर सर्जरी मददगार हो सकती है। सर्जरी में देर करने से नर्व्स को स्थायी नुकसान हो सकता है, जो बाद में ऑपरेशन के बाद भी पूरी तरह ठीक न हो पाए।“
स्पाइन सर्जरी का मुख्य उद्देश्य नर्व्स पर से दबाव हटाना होता है, चाहे वह निकली हुई डिस्क हो, मोटा हुआ लिगामेंटम फ्लेवम, बढ़े हुए जोड़ या मोटी हड्डी। अगर स्पाइन अस्थिर पाई जाती है, तो उसे स्टेबल भी किया जाता है। इसके बाद नियमित फॉलो-अप और धीरे-धीरे बढ़ने वाला रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम जरूरी होता है। सही समय पर की गई स्पाइन सर्जरी सुरक्षित होती है और इसके नतीजे भरोसेमंद होते हैं, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी की क्वालिटी में साफ सुधार आता है। हालांकि, बेहतरीन रिजल्ट के लिए 9 से 12 महीनों तक कुछ सावधानियों और सीमाओं का पालन करना जरूरी होता है।

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