आगरा 9 फरवरी 2026। लिवर ट्रांसप्लांट अब कोई अनजान मेडिकल शब्द नहीं रह गया है, बल्कि भारत में यह एक स्थापित और प्रभावी इलाज का विकल्प बन चुका है। देश में गंभीर लिवर बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। इसके पीछे मोटापे से जुड़ा फैटी लिवर, क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी और सी, शराब से होने वाला लिवर डैमेज, कुछ जेनेटिक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर और बच्चों व बड़ों दोनों में अचानक होने वाला एक्यूट लिवर फेल्योर जैसे कारण प्रमुख हैं। जब लिवर उस स्टेज पर पहुंच जाता है जहां दवाओं से सुधार संभव नहीं होता, तब लिवर ट्रांसप्लांट ही जीवन बचाने का एकमात्र असरदार तरीका रह जाता है।
लिवर ट्रांसप्लांट में खराब हो चुके लिवर को एक स्वस्थ डोनर लिवर से बदला जाता है। यह डोनर ब्रेन-डेड व्यक्ति हो सकता है, जिसके अंग कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन के जरिए मिलते हैं, या फिर कोई जीवित रिश्तेदार जो अपने लिवर का एक हिस्सा दान करता है। इंसानी लिवर की सबसे खास बात यह है कि उसमें खुद को दोबारा विकसित करने यानी रीजनरेट करने की क्षमता होती है। इसी वजह से एक स्वस्थ डोनर के लिवर का हिस्सा रिसीवर के लिए पूरी तरह काम कर सकता है। भारत में कैडेवरिक डोनर्स की सीमित उपलब्धता के कारण लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट अधिक व्यावहारिक विकल्प बन गया है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के लिवर एंड बिलियरी साइंसेज़ विभाग के कंसल्टेंट डॉ. विपुल गौतम ने बताया “मृत डोनर्स की कमी आज भी भारत की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। कई पश्चिमी देशों की तुलना में यहां कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन की दर अभी भी कम है। इसी कारण लिविंग डोनेशन ट्रांसप्लांट प्रोग्राम की रीढ़ बन चुका है। आम लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट पूरी तरह हाई सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के साथ किया जाता है। डोनर की जांच बहुत डिटेल में होती है और सर्जरी पूरी सावधानी के साथ की जाती है। इसके साथ-साथ यह भी जरूरी है कि हम कैडेवरिक डोनेशन को भी उतना ही महत्व दें। ब्रेन डेथ के बाद ऑर्गन डोनेशन के लिए समाज में जागरूकता, ऑर्गन प्लेज और परिवार की सहमति की संस्कृति को मजबूत करने की जरूरत है। एक कैडेवरिक डोनर कई जिंदगियों को नया जीवन दे सकता है, इसलिए यह केवल एक मेडिकल नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।“
आज भारत लिवर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में अग्रणी देशों में गिना जाता है। यहां अनुभवी डॉक्टर, एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई लेवल सर्जिकल व मेडिकल एक्सपर्टीज उपलब्ध है। भारतीय ट्रांसप्लांट सेंटर्स इंटरनेशनल प्रोटोकॉल का पालन करते हैं और उनके रिज़ल्ट्स दुनिया के बेहतरीन प्रोग्राम्स के बराबर हैं। बेहतर नतीजों और अपेक्षाकृत कम खर्च के कारण लिवर ट्रांसप्लांट अब बड़ी संख्या में मरीजों के लिए संभव हो पाया है। भारत की मजबूती का एक बड़ा संकेत यह भी है कि कई विदेशी मरीज लिवर ट्रांसप्लांट के लिए यहां आते हैं। उन्हें यहां वर्ल्ड-क्लास मेडिकल केयर, भरोसेमंद हॉस्पिटल सिस्टम, ट्रांसपेरेंट प्रक्रियाएं और अन्य देशों की तुलना में काफी कम लागत मिलती है। यह अंतरराष्ट्रीय भरोसा बताता है कि भारत इस क्षेत्र में कितनी तेजी से आगे बढ़ा है।
अगर समाज में जागरूकता बढ़े, तो ट्रांसप्लांट और भी ज्यादा प्रभावी हो सकता है। लगातार पीलिया रहना, बिना कारण पेट में सूजन, बार-बार ब्लीडिंग, अत्यधिक कमजोरी या लिवर मरीज में अचानक नींद या सुस्ती जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत स्पेशलिस्ट से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और सही सलाह से न केवल गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है, बल्कि इलाज का खर्च भी नियंत्रण में रखा जा सकता है।

0 टिप्पणियाँ