अलीगढ़ 18 मार्च 2026। दिल की बीमारी को पहले सिर्फ पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन यह सच नहीं है। दुनियाभर में महिलाओं में भी हार्ट डिजीज बीमारी और मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। अच्छी बात यह है कि कई हार्ट से जुड़ी समस्याओं को साधारण लाइफस्टाइल बदलाव और नियमित जांच के जरिए रोका जा सकता है। एक महिला अपने जीवन के अलग-अलग चरणों—जैसे प्यूबर्टी, प्रेग्नेंसी, मदरहुड और मेनोपॉज—से गुजरती है, और हर चरण में दिल की देखभाल करना बेहद जरूरी होता है।
महिलाओं के लिए दिल को सुरक्षित रखने का सबसे आसान तरीका है एक्टिव रहना। नियमित फिजिकल एक्टिविटी से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, वजन संतुलित रहता है और स्ट्रेस भी कम होता है। रोज़ाना 30-45 मिनट तेज चलना हार्ट हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद है। व्यस्त दिनचर्या में इसे 10-15 मिनट के छोटे हिस्सों में भी किया जा सकता है। इसके अलावा, हफ्ते में 2-3 बार वेट ट्रेनिंग या बॉडी वेट एक्सरसाइज करने से मसल्स मजबूत होते हैं और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है, जो हार्ट डिजीज के रिस्क को कम करता है।
मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. सुमित कुमार ने बताया “संतुलित आहार लेना भी बेहद जरूरी है। अपनी थाली में सब्जियां, फल, होल ग्रेन और प्रोटीन जैसे दाल, बीन्स, नट्स, सीड्स और दही शामिल करें। ये सभी पोषक तत्व शरीर को कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने और हार्ट को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इसके साथ ही डीप-फ्राइड फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, बेकरी आइटम्स और शुगर वाले ड्रिंक्स का सेवन कम करें क्योंकि इनमें अनहेल्दी फैट, सोडियम और शुगर अधिक होती है। फैड डाइट्स की बजाय घर का बना सादा और पौष्टिक खाना बेहतर विकल्प है। हर साल हेल्थ चेकअप कराना जरूरी है, भले ही आप खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रही हों। साल में कम से कम एक बार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूर कराएं ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके। जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी समस्या रही हो, जो मेनोपॉज से गुजर रही हों या जिनके परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास हो, उन्हें खास तौर पर नियमित जांच पर ध्यान देना चाहिए।“
अच्छी नींद भी दिल की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। हर रात 7-8 घंटे की नींद लेने की कोशिश करें। पर्याप्त नींद से शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, हार्मोन बैलेंस रहते हैं और ब्लड प्रेशर व मेटाबॉलिज्म कंट्रोल में रहता है। लगातार नींद की कमी से वजन बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर असंतुलन का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. सुमित ने आगे बताया “स्ट्रेस मैनेज करना भी महिलाओं के दिल के लिए बेहद जरूरी है। घर और काम की जिम्मेदारियों के चलते महिलाओं में स्ट्रेस अक्सर ज्यादा होता है। ऐसे में गहरी सांस लेना, मेडिटेशन करना, प्रार्थना करना या परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। भावनात्मक स्वास्थ्य का सीधा संबंध हार्ट हेल्थ से होता है। महिलाओं को हार्ट प्रॉब्लम के शुरुआती लक्षणों के बारे में भी जागरूक रहना चाहिए। जहां पुरुषों में आमतौर पर सीने में दर्द या जकड़न जैसे लक्षण दिखते हैं, वहीं महिलाओं में थकान, सांस फूलना, मतली, सीने में हल्की असहजता, पीठ या जबड़े में दर्द जैसे अलग तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अक्सर इन संकेतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, इसलिए ऐसे किसी भी लक्षण को महसूस होते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।“
एक मजबूत दिल बनाने के लिए महिलाओं को रोज़ाना छोटे-छोटे लेकिन लगातार सही फैसले लेने होते हैं। एक्टिव रहना, हेल्दी खाना, स्ट्रेस को कंट्रोल करना और अपनी सेहत की नियमित जांच कराना—ये सभी कदम हर उम्र में दिल को स्वस्थ रखने और बेहतर जीवन जीने में मदद करते हैं।

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