- डाबर इंडिया मार्केटिंग हेड, एथिकल्स,डॉ. दुर्गा प्रसाद ने स्वास्थ्य, आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर रखे विचार
कानपुर 12 अक्टूबर 2026। भारत की प्राचीन आयुर्वेदिक विरासत और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित ‘विज्ञान और अध्यात्म का संगम: आरोग्य मंथन’ कार्यक्रम में डाबर इंडिया लिमिटेड के मार्केटिंग हेड, एथिकल्स, डॉ. दुर्गा प्रसाद ने समग्र स्वास्थ्य और कल्याण (Holistic Wellness) के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. दुर्गा प्रसाद ने कहा कि आज के समय में स्वास्थ्य को केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन को भी समान महत्व देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद सदियों से शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित जीवनशैली का मार्गदर्शन करता आया है, और आधुनिक विज्ञान भी अब समग्र स्वास्थ्य की इसी अवधारणा को स्वीकार कर रहा है।
उन्होंने कहा, विज्ञान और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि मानव कल्याण के लिए पूरक हैं। जहां विज्ञान स्वास्थ्य संबंधी सिद्धांतों और उपचारों को प्रमाणित करता है, वहीं अध्यात्म व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मकता और जीवन में संतुलन प्रदान करता है। दोनों के समन्वय से ही स्वस्थ और समृद्ध समाज का निर्माण संभव है।
डॉ. प्रसाद ने आयुर्वेद में निहित वैज्ञानिक सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवनशैली संबंधी रोगों की बढ़ती चुनौतियों के बीच आज आवश्यकता इस बात की है कि लोग अपने दैनिक जीवन में संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, योग, ध्यान और प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धतियों को अपनाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि डाबर, विज्ञान आधारित आयुर्वेदिक समाधानों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित, प्रभावी और विश्वसनीय स्वास्थ्य उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। कंपनी आधुनिक अनुसंधान और पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान के समन्वय के माध्यम से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और कल्याण को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
‘आरोग्य मंथन’ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, स्वास्थ्य पेशेवरों, शिक्षाविदों और अध्यात्म से जुड़े वक्ताओं ने भाग लिया तथा विज्ञान और अध्यात्म के बीच बढ़ते सामंजस्य पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक मानसिकता ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य का आधार है।

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